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नेपाल जैसी तबाही का डर! हिमाचल-उत्तराखंड में कितना गंभीर है खतरा?

नेपाल जैसी तबाही का डर! हिमाचल-उत्तराखंड में कितना गंभीर है खतरा?

नेपाल जैसी तबाही के बीच हिमाचल-उत्तराखंड में भी खतरे की आशंका, कितना गंभीर है मामला?

नेपाल में ग्लेशियर से जुड़ी विनाशकारी बाढ़ ने पूरे हिमालयी क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसी ही स्थिति भारत के हिमालयी राज्यों—हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड—में भी बन सकती है?

फिलहाल इसका जवाब है कि जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, लेकिन नेपाल जैसी घटना की कोई निश्चित चेतावनी नहीं है। मौजूदा खतरा मुख्य रूप से भारी बारिश, अचानक बाढ़ और भूस्खलन का है।

उत्तराखंड में ज्यादा चिंता

भारत मौसम विज्ञान विभाग के 2 सितंबर के अलर्ट के मुताबिक उत्तराखंड में 2 सितंबर को बहुत भारी बारिश और उसके बाद 3 से 8 सितंबर तक कई दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी है। इससे पहाड़ी नदियों-नालों में अचानक पानी बढ़ने और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।

हाल के दिनों में उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण भूस्खलन, मकान गिरने और नदी-नालों के उफान की घटनाएं भी सामने आई हैं।

हिमाचल में भी अलर्ट

हिमाचल प्रदेश में 2 और 3 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। ऐसे में पहाड़ी ढलानों पर पहले से जमा पानी मिट्टी और चट्टानों को कमजोर कर सकता है।

हिमाचल के आधिकारिक आपदा प्रबंधन सिस्टम में भी भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं की लगातार निगरानी की जा रही है।

क्या नेपाल जैसी ग्लेशियर बाढ़ भारत में भी आ सकती है?

संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि हिमाचल और उत्तराखंड भी ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में आते हैं। लेकिन किसी खास जगह ग्लेशियर टूटने या अचानक GLOF आने की भविष्यवाणी केवल सामान्य बारिश के अलर्ट से नहीं की जा सकती।

इसलिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता भारी बारिश + कमजोर ढलान + अचानक बढ़ता नदी-जलस्तर है।

लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

पहाड़ी इलाकों में रहने वाले या यात्रा करने वाले लोगों को नदी-नालों के किनारे जाने से बचना चाहिए। भारी बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर अनावश्यक यात्रा न करना और प्रशासन तथा IMD की चेतावनियों का पालन करना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

निष्कर्ष: नेपाल की त्रासदी ने हिमालय की संवेदनशीलता को जरूर उजागर किया है। हिमाचल और उत्तराखंड में अभी स्थिति को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन घबराने की नहीं।


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