करणी सेना का BJP-कांग्रेस के खिलाफ बड़ा ऐलान, निकाय चुनाव से पहले महिपाल मकराना ने बढ़ाई सियासी हलचल!
- bySanjay
- 02 September, 2026
करणी सेना का BJP-कांग्रेस के खिलाफ ऐलान, निकाय चुनाव में कितना पड़ेगा असर? महिपाल मकराना ने बढ़ाई सियासी हलचल

जयपुर: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के बयानों ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों की चिंता बढ़ा दी है। मकराना ने यूजीसी के नए नियमों के विरोध को लेकर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के खिलाफ चुनावी बहिष्कार का ऐलान किया है।
आखिर पूरा मामला क्या है?
करणी सेना लंबे समय से UGC के नए नियमों के रोलबैक की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है। संगठन का आरोप है कि नए नियम सवर्ण समाज के हितों के खिलाफ हैं। इसी मुद्दे को लेकर राजस्थान में करीब 800 किलोमीटर की पदयात्रा और विरोध कार्यक्रम भी किए गए।
3 अगस्त को जयपुर में हुए आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद करणी सेना और सरकार के बीच टकराव और बढ़ गया। इसके बाद संगठन ने चुनाव में राजनीतिक जवाब देने की बात कही।
पहले BJP को वोट नहीं देने की अपील
महिपाल सिंह मकराना ने जयपुर में आयोजित रैली के दौरान लोगों से आगामी नगर निकाय चुनाव में BJP को वोट नहीं देने की शपथ दिलाई थी। इसके बाद उनके बयान को लेकर राजस्थान की राजनीति में काफी चर्चा हुई।
हालांकि मकराना ने यह भी स्पष्ट किया था कि BJP का विरोध करने का मतलब अपने आप कांग्रेस का समर्थन करना नहीं है। संगठन उन उम्मीदवारों का समर्थन करने की बात कर रहा है जो UGC नियमों को वापस लेने के पक्ष में लिखित आश्वासन देंगे।
अब कांग्रेस को भी झटका
1 सितंबर को बीकानेर में दिए गए बयान में मकराना ने BJP और कांग्रेस दोनों के बहिष्कार की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों दलों को सवर्ण समाज अपना वोट देता रहा है, लेकिन अब समाज अपने वोट की ताकत का एहसास कराएगा।
यानी करणी सेना फिलहाल किसी एक प्रमुख पार्टी के पक्ष में खुलकर खड़ी नहीं दिखाई दे रही है।
चुनाव में कितना असर पड़ेगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या करणी सेना का यह अभियान चुनावी नतीजों को प्रभावित कर पाएगा?
नगर निकाय चुनाव में मुकाबला अक्सर बहुत कम वोटों के अंतर से होता है। ऐसे में किसी खास क्षेत्र में संगठित वोटों का रुख बदलना उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन इसका वास्तविक असर कितना होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि संगठन की अपील कितने मतदाताओं तक पहुंचती है और स्थानीय उम्मीदवारों के स्तर पर मतदाता किसे चुनते हैं।
राजस्थान के नगर निकाय चुनाव 9 और 11 सितंबर 2026 को होने हैं और नतीजे 14 सितंबर को आने हैं। इसलिए अब राजनीतिक दलों की नजर करणी सेना के अभियान और उसके जमीनी असर पर भी रहेगी।
BJP के लिए क्यों अहम है मामला?
BJP के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि करणी सेना का अभियान सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है। संगठन ने कार्यकर्ताओं से घर-घर जाकर अपना संदेश पहुंचाने की बात कही है। ऐसे में पार्टी को स्थानीय स्तर पर संभावित नाराजगी को संभालने की चुनौती मिल सकती है।
फिलहाल तस्वीर साफ नहीं
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मकराना के ऐलान से BJP या कांग्रेस को कितनी सीटों का नुकसान होगा। निकाय चुनाव में स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, जातीय समीकरण और पार्टी संगठन भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
अब असली परीक्षा 9 और 11 सितंबर की वोटिंग में होगी—क्या करणी सेना की अपील वोट में बदलेगी या फिर मतदाता स्थानीय समीकरणों के आधार पर फैसला करेंगे?
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