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AI से लैस हैकर्स के निशाने पर भारतीय बैंक और फिनटेक कंपनियां, CERT-In ने 'Crafty Falcon' को लेकर जारी किया क्रिटिकल अलर्ट

AI से लैस हैकर्स के निशाने पर भारतीय बैंक और फिनटेक कंपनियां, CERT-In ने 'Crafty Falcon' को लेकर जारी किया क्रिटिकल अलर्ट

भारत की बैंकिंग और डिजिटल वित्तीय व्यवस्था पर साइबर हमलों का खतरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल अब साइबर अपराधों को अधिक तेज और स्वचालित बनाने में किया जा रहा है। इसी बीच भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) ने 'Crafty Falcon' नाम से पहचाने गए एक सक्रिय साइबर अभियान को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। इस अभियान के निशाने पर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC), डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म, फिनटेक संस्थान, पेमेंट एग्रीगेटर और क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बताए गए हैं।

रॉयटर्स की 5 नवंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, हमलावर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध AI आधारित टूल्स का इस्तेमाल करके वित्तीय संस्थानों के सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। CERT-In ने इस खतरे को सक्रिय और जारी बताया है। एजेंसी के मुताबिक, हमले इतनी तेजी से किए जा रहे हैं कि पारंपरिक सुरक्षा निगरानी व्यवस्था के लिए उन्हें समय रहते पहचानना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

क्या है 'Crafty Falcon' साइबर अभियान?

CERT-In की वित्तीय क्षेत्र की साइबर सुरक्षा टीम CSIRT-Fin ने इस अभियान के पीछे सक्रिय खतरे को 'Crafty Falcon' नाम दिया है। एजेंसी के विश्लेषण में सामने आया है कि हमलावर मशीन इंटेलिजेंस की मदद से अपने संभावित लक्ष्यों का आकलन करते हैं और फिर वित्तीय संस्थानों की डिजिटल भुगतान प्रणालियों को निशाना बनाते हैं।

इस अभियान की सबसे चिंताजनक बात यह है कि हमलावर केवल सामान्य कंप्यूटर सिस्टम में घुसपैठ करने की कोशिश नहीं कर रहे, बल्कि कंपनियों के अपने भुगतान और धन वितरण सिस्टम का दुरुपयोग भी कर रहे हैं। इससे अनधिकृत वित्तीय लेनदेन का खतरा पैदा हो सकता है।

CERT-In ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ वित्तीय संस्थानों को पहले सुरक्षा संबंधी चेतावनी मिलने और सुधारात्मक कदम उठाने के बावजूद दोबारा निशाना बनाया गया। इससे पता चलता है कि अधूरे सुरक्षा सुधार कंपनियों के लिए बड़ा जोखिम बन सकते हैं।

चार AI टूल्स की पहचान, कम समय में तैयार हो सकती हैं कई हमलावर गतिविधियां

CERT-In ने इस साइबर अभियान के विश्लेषण में चार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध AI आधारित टूल्स का उल्लेख किया है।

ARTEX: AI आधारित साइबर सुरक्षा और पेनिट्रेशन टेस्टिंग से जुड़ा टूल।

PentAGI: मल्टी-एजेंट AI आधारित स्वचालित पेनिट्रेशन टेस्टिंग सिस्टम।

Cairn: साइबर हमलों से संबंधित गतिविधियों के विश्लेषण और खोज से जुड़ा टूल।

CyberStrikeAI: साइबर सुरक्षा परीक्षण और हमले से जुड़ी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाला फ्रेमवर्क।

एजेंसी के अनुसार, इन टूल्स की मदद से हमलावर बड़ी संख्या में कस्टम स्क्रिप्ट तैयार कर सकते हैं और सिस्टम से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं के अनुसार अपनी गतिविधियों में बदलाव कर सकते हैं।

सुरक्षा शोधकर्ताओं ने इनमें से कम से कम दो टूल्स के चीन से संबंध होने की बात कही है। ARTEX का इस्तेमाल दक्षिण कोरिया के बैंकों को निशाना बनाने वाले हमलों में भी सामने आया था। हालांकि CERT-In ने Crafty Falcon के पीछे मौजूद व्यक्तियों या संगठन की पहचान सार्वजनिक नहीं की है और न ही इसे किसी सरकार द्वारा प्रायोजित हमला घोषित किया है।

बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम पर क्यों बढ़ी चिंता?

इस साइबर अभियान में कंपनियों के पेमेंट और डिस्बर्समेंट API को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। API ऐसी डिजिटल व्यवस्था होती है, जिसके माध्यम से बैंक, NBFC और फिनटेक कंपनियां एक-दूसरे के सिस्टम से जुड़कर लेनदेन और भुगतान संबंधी काम करती हैं।

यदि इन प्रणालियों की सुरक्षा में खामी रह जाती है तो उसका फायदा उठाकर अनधिकृत लेनदेन का खतरा पैदा हो सकता है। यही वजह है कि CERT-In ने वित्तीय संस्थानों को अपने डिजिटल भुगतान नेटवर्क की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हमलावर सप्ताहांत, छुट्टियों और ऐसे समय को निशाना बनाते हैं, जब संस्थानों में सुरक्षा निगरानी करने वाले कर्मचारियों की संख्या कम होती है। इससे संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने और तुरंत कार्रवाई करने में देरी हो सकती है।

हाल के साइबर मामलों ने बढ़ाई चिंता

भारत में हाल के दिनों में कई वित्तीय संस्थानों से जुड़े साइबर सुरक्षा मामले सामने आए हैं।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई की दो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के खातों से 8 और 9 अक्टूबर को 700 से अधिक अनधिकृत तत्काल ट्रांसफर के जरिए करीब 20 लाख डॉलर की रकम निकाले जाने की शिकायत सामने आई थी। इन लेनदेन में ICICI बैंक से जुड़े भुगतान सिस्टम का उल्लेख किया गया था।

इसके अलावा भारतीय स्टेट बैंक ने पिछले महीने डार्क वेब पर 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड लीक होने की जानकारी दी थी। स्पंदना स्फूर्ति फाइनेंशियल ने 1 नवंबर को बैंक खाते से अनधिकृत डेबिट की सूचना दी, जबकि AU स्मॉल फाइनेंस बैंक संभावित ग्राहक डेटा लीक की जांच कर रहा है।

हालांकि CERT-In ने इन सभी घटनाओं को Crafty Falcon अभियान से जुड़ा हुआ घोषित नहीं किया है। इसलिए इन मामलों को अलग-अलग साइबर सुरक्षा घटनाओं के रूप में ही देखना जरूरी है।

कंपनियों को 24 घंटे सुरक्षा निगरानी की सलाह

CERT-In ने वित्तीय संस्थानों को साइबर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और लगातार निगरानी बनाए रखने की सलाह दी है। एजेंसी के मुताबिक, छुट्टियों और सप्ताहांत के दौरान भी सुरक्षा निगरानी में ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

कंपनियों को अपने डिजिटल भुगतान सिस्टम, क्लाउड सेवाओं और ग्राहक डेटा की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पहचान होने पर उसकी तुरंत जांच और आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

एजेंसी ने यह भी सलाह दी है कि साइबर हमले के बाद केवल शुरुआती खामी ठीक करना पर्याप्त नहीं है। पूरे सिस्टम की जांच करके यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि हमलावरों की पहुंच पूरी तरह समाप्त हो गई है।

AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने साइबर सुरक्षा की चुनौती बढ़ाई

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार सहित कई क्षेत्रों में काम करने के तरीके बदल दिए हैं। लेकिन यही तकनीक साइबर अपराधियों के लिए भी नए अवसर पैदा कर रही है।

पहले जिन गतिविधियों में अधिक समय और तकनीकी मेहनत लगती थी, उनमें AI की मदद से तेजी लाई जा सकती है। ऐसे में वित्तीय संस्थानों के लिए केवल पुराने सुरक्षा उपायों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।

भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं का विस्तार लगातार हो रहा है। ऐसे में बैंकिंग नेटवर्क, ग्राहक डेटा और डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। Crafty Falcon से जुड़ी चेतावनी ने एक बार फिर दिखाया है कि AI के दौर में साइबर सुरक्षा को लेकर कितनी सतर्कता जरूरी है।


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