कन्हैया लाल हत्याकांड में राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रियाज अत्तारी और गौस समेत 8 आरोपियों की अपील खारिज
- bySanjay
- 07 November, 2026
कन्हैया लाल हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 8 आरोपियों की अपील खारिज; UAPA के तहत मुकदमा जारी रहेगा

जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित उदयपुर कन्हैया लाल हत्याकांड में राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले के आठ आरोपियों की ओर से दायर अपीलों को खारिज करते हुए विशेष एनआईए अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों को बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद आठों आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत मुकदमे की सुनवाई आगे जारी रह सकेगी।
6 नवंबर 2026 को आई पीटीआई की रिपोर्ट और 7 नवंबर को प्रकाशित विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि निचली अदालत की ओर से आरोप तय करने के आदेशों में हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल साजिश का प्रत्यक्ष सबूत या चश्मदीद गवाह नहीं होने से आरोपियों को आरोपमुक्त नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनाया फैसला
इस मामले की सुनवाई राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने की। अदालत ने 5 नवंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए आठ आरोपियों की अपीलें खारिज कर दीं।
आरोपियों ने विशेष एनआईए अदालत की ओर से 12 जनवरी 2024 और 13 फरवरी 2024 को पारित आरोप तय करने के आदेशों को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि मामले में UAPA के प्रावधान लागू करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार मौजूद नहीं हैं।
हालांकि, हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश सामग्री को प्रथम दृष्टया आरोपों के स्तर पर विचार करने योग्य माना और निचली अदालत के आदेशों को बरकरार रखा।
किन आठ आरोपियों की अपील हुई खारिज?
हाईकोर्ट ने जिन आठ आरोपियों की अपीलें खारिज की हैं, उनके नाम इस प्रकार हैं:
मोहम्मद रियाज अत्तारी
मोहम्मद गौस
मोहसिन खान
आसिफ हुसैन
मोहम्मद मोहसिन
वसीम अली
मोहम्मद जावेद खान
मुस्लिम खान
इन आरोपियों ने UAPA के तहत तय किए गए आरोपों को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद विशेष एनआईए अदालत में इनके खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
अदालत ने साजिश के प्रत्यक्ष सबूत पर क्या कहा?
इस मामले में आरोपियों की ओर से दलील दी गई थी कि उनके खिलाफ आपराधिक साजिश के पर्याप्त प्रत्यक्ष सबूत मौजूद नहीं हैं। उन्होंने बरामद वीडियो, कथित धमकियों और प्रतिबंधित संगठन से संबंध के आरोपों को लेकर भी सवाल उठाए थे।
वहीं, जांच एजेंसी ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि आपराधिक साजिश को केवल प्रत्यक्ष साक्ष्य से ही साबित करना आवश्यक नहीं है। घटनाक्रम, परिस्थितियों और जांच में सामने आए तथ्यों को एक साथ देखकर भी साजिश के पहलुओं की जांच की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने इस दलील पर विचार करते हुए कहा कि साजिश का प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध नहीं होना अपने आप में आरोपमुक्त करने का निर्णायक आधार नहीं है। अदालत के अनुसार, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के संयुक्त प्रभाव से भी साजिश के पहलुओं का आकलन किया जा सकता है।
UAPA की किन धाराओं के तहत हैं आरोप?
आठों आरोपियों के खिलाफ UAPA की धारा 16, 18 और 20 सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए गए हैं।
आरोपियों ने इन धाराओं के इस्तेमाल को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि जांच में ऐसा पर्याप्त आधार नहीं है जिससे UAPA के प्रावधान लागू किए जा सकें।
दूसरी ओर, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दलील दी कि जांच में सामने आए तथ्यों, कथित साजिश, वीडियो और अन्य परिस्थितियों को मुकदमे के दौरान विस्तार से परखा जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने के चरण में अदालत को पूरे मामले का ट्रायल करके किसी की दोषसिद्धि या निर्दोषता निर्धारित नहीं करनी होती। इस स्तर पर यह देखना होता है कि अभियोजन की सामग्री प्रथम दृष्टया मामला बनाती है या नहीं
क्या था 28 जून 2022 का कन्हैया लाल हत्याकांड?
उदयपुर में 28 जून 2022 को दर्जी कन्हैया लाल टेली की उनकी दुकान पर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे देश में व्यापक आक्रोश पैदा किया था।
मामले के अनुसार, मुख्य आरोपी मोहम्मद रियाज अत्तारी और मोहम्मद गौस ग्राहक बनकर दुकान पर पहुंचे थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि कन्हैया लाल की सोशल मीडिया गतिविधियों और नूपुर शर्मा के समर्थन में साझा की गई पोस्ट को लेकर विवाद हुआ था।
घटना के बाद आरोपियों द्वारा वीडियो रिकॉर्ड किए जाने का मामला भी सामने आया था। जांच आगे बढ़ने पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मामले में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की और विशेष अदालत में आरोप पत्र पेश किया।
हाईकोर्ट के फैसले का आगे क्या असर होगा?
हाईकोर्ट के इस फैसले का सीधा असर मुकदमे की आगे की कार्यवाही पर पड़ेगा। आठों आरोपियों की अपीलें खारिज होने के बाद विशेष एनआईए अदालत में उनके खिलाफ पहले से तय आरोपों के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ सकेगी।
हालांकि, इस फैसले को आरोपियों की दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। अदालत ने फिलहाल केवल आरोप तय करने के आदेशों को बरकरार रखा है। आरोपियों के खिलाफ पेश किए गए साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और उनकी विश्वसनीयता की जांच मुकदमे के दौरान होगी।
यानी कन्हैया लाल हत्याकांड में हाईकोर्ट का फैसला मुकदमे की आगे की सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन आठों आरोपियों के दोषी या निर्दोष होने का अंतिम फैसला अभी होना बाकी है।
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राजस्थान में अपराधों...
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