राजस्थान में भजनलाल और गहलोत के बीच चौथे दिन भी जुबानी जंग जारी, मुख्यमंत्री से बोले पूर्व CM–जनता से मांगिए माफी
- bySanjay
- 06 November, 2026
जयपुर। राजस्थान की राजनीति में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच शुरू हुई बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को चौथे दिन भी जारी रहा। पुराने खाद और बीज के कारोबार से शुरू हुआ यह विवाद अब पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल, कथित भ्रष्टाचार, पेपर लीक और सरकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दों तक पहुंच गया है।
शुक्रवार को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बयानों पर फिर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियों से मुख्यमंत्री की अपनी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से राजस्थान की जनता के सामने माफी मांगने की अपील की।
जोधपुर की सभा से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत 3 नवंबर को जोधपुर में बीजेपी के लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ अभियान के दौरान हुई थी। यहां आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अशोक गहलोत के पुराने खाद और बीज के कारोबार का जिक्र करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।
मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि गहलोत जब खाद और बीज का कारोबार करते थे, उस समय किसानों को महंगे और कथित तौर पर नकली उत्पाद बेचे जाते थे। उन्होंने पुराने गोदाम पर कार्रवाई और किसानों के पास मौजूद बिलों का भी उल्लेख किया था।
मुख्यमंत्री के इन आरोपों के बाद राजस्थान की राजनीति में विवाद खड़ा हो गया।
गहलोत ने 24 घंटे में सबूत या माफी की मांग की
मुख्यमंत्री के आरोपों पर अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के माध्यम से जवाब दिया। उन्होंने आरोपों को निराधार और तथ्यहीन बताते हुए मुख्यमंत्री से कहा कि यदि उनके पास कोई प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए।
गहलोत ने 24 घंटे का समय देते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री आरोपों के समर्थन में दस्तावेज पेश करें या सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
उन्होंने अपने पुराने कारोबार के बारे में भी सफाई दी। गहलोत के अनुसार, पीपाड़ में खाद और बीज की दुकान लगभग छह महीने तक चली थी, जिसके बाद उन्होंने उसे बंद कर दिया था।
जयपुर की सभा में मुख्यमंत्री का फिर पलटवार
5 नवंबर को जयपुर में आयोजित बीजेपी की लोकतंत्र बचाओ रैली में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गहलोत पर एक बार फिर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जोधपुर में उनके बयान के बाद गहलोत परेशान हो गए हैं और आने वाले समय में उन्हें और जवाब मिलेंगे।
मुख्यमंत्री ने गहलोत के सामने कई सवाल रखे। उन्होंने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में नियुक्ति, जल जीवन मिशन से जुड़े कथित घोटाले और पिछली सरकार के दौरान गिरफ्तार हुए अधिकारियों एवं नेताओं का जिक्र किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पिछली सरकार के दौरान RPSC में ऐसे सदस्य की नियुक्ति नहीं हुई थी, जो बाद में जेल गया? क्या जल जीवन मिशन मामले में कार्रवाई नहीं हुई? मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब गहलोत को देना चाहिए।
गहलोत ने पुराने कारोबार को लेकर दिया जवाब
गहलोत ने मुख्यमंत्री के आरोपों पर अपने पुराने कारोबार का पूरा घटनाक्रम बताते हुए कहा कि उन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद पीपाड़ में खाद और बीज की दुकान शुरू की थी। यह दुकान लगभग छह महीने चली और बाद में उन्होंने इसे बंद कर दिया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जिस समय यह कारोबार हुआ, उस समय भजनलाल शर्मा की उम्र लगभग पांच वर्ष थी। ऐसे में मुख्यमंत्री इतने पुराने मामले को लेकर किस आधार पर आरोप लगा रहे हैं?
गहलोत ने फिर दोहराया कि मुख्यमंत्री को अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज जनता के सामने रखने चाहिए।
कांग्रेस और बीजेपी के दूसरे नेता भी आमने-सामने
दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच शुरू हुई बयानबाजी का असर अब बीजेपी और कांग्रेस के अन्य नेताओं के बयानों में भी दिखाई दे रहा है। कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है, जबकि बीजेपी नेताओं की ओर से पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं।
कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री से माफी मांगने की मांग की जा रही है। वहीं बीजेपी का कहना है कि पिछली सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर सवाल उठाना जरूरी है।
अब आगे क्या होगा?
राजस्थान में यह राजनीतिक विवाद अब केवल पुराने खाद-बीज के कारोबार तक सीमित नहीं रहा। दोनों नेताओं के बीच RPSC, जल जीवन मिशन, पेपर लीक और पिछली सरकार के कार्यकाल से जुड़े मुद्दों पर भी आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं।
शुक्रवार को चौथे दिन भी गहलोत ने मुख्यमंत्री से जनता के सामने माफी मांगने की अपील की। दूसरी ओर मुख्यमंत्री अपने पुराने आरोपों को दोहराते हुए उनका जवाब देने की बात कह चुके हैं।
अब राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या दोनों नेता अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज और तथ्य सार्वजनिक करेंगे या राजस्थान की राजनीति में यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी।
ध्यान दें: दोनों नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। उनके समर्थन में आधिकारिक दस्तावेज या जांच के निष्कर्ष सामने आने पर ही उनकी पुष्टि हो सकेगी।
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